‘सांस्कृतिक आपातकाल’ और ‘विश्वरूपम्’
कमल हासन की 94 करोड़ की लागत से बनी फिल्म ‘विश्वरूपम्’ से उपजे विवाद, कुछ मुस्लिम
धार्मिक संगठनों के विरोध और मद्रास हाई कोर्ट की एक पीठ द्वारा पाबंदी हटाये जाने
के बाद तमिलनाडु सरकार की इस फैसले के खिलाफ अपील | फिल्म के
बारे में सरकार के रवैये और कुछ संगठनों के विरोध –प्रदर्शन के बाद कमल हासन द्वारा हताशा की स्थिति में देश छोड़ कर
चले जाने की बात करने के मुद्दे ने भारत के बुद्धिजीवियों के बीच एक बहस की शुरुआत
कर दी है | अब यह विचारणीय हो गया है कि क्या इस देश में आज अभिव्यक्ति की आज़ादी
सुरक्षित नहीं है? क्या आज़ादी के 65 साल बाद भी देश में व्याप्त विसंगतियों और
अराजकताओं की अभिव्यक्ति कला- माध्यमों के जरिये नहीं की जासकती ?और क्या सलमान
रुश्दी की भाषा में यह देश सचमुच ‘सांस्कृतिक आपातकाल’ की स्थिति से गुजर रहा है ?
सलमान रुश्दी बहुत गलत नहीं हैं | उन्होंने ऐसा तब कहा था जब कोलकाता में अंतिम
समय में उनकी यात्रा रद्द कर दी गयी, जब वे दीपा मेहता की फिल्म ‘मिड नाईट
चिल्ड्रेंस’ [ यह फिल्म रुश्दी के उपन्यास पर आधारित है ] के प्रमोशन के लिए जा
रहे थे |
देश एक
अघोषित सांस्कृतिक आपातकाल से अवश्य गुजर रहा है | क्योंकि कभी कट्टरपंथी धार्मिक
संगठन तो कभी समाज का कोई वर्ग देश के संस्कृतिकर्मियों, कलाकारों और
बुद्धिजीवियों की अभिव्यक्ति पर मात्र प्रश्न चिन्ह ही नहीं लगाता बल्कि सांघातिक
विरोध पर भी उतर आता है | जयपुर में आशीष नंदी के बयान पर उनका पुतला जलाया
जाना,लखनऊ में ‘वजाइना मोनोलॉग’ के प्रदर्शन पर प्रतिबन्ध और दिल्ली में
पाकिस्तानी नाटक के शो का रद्द किया जाना आखिर क्या सिद्ध करता है ? कमल हासन ने
अपने देश छोड़ने की बात करते हुए मकबूल फ़िदा हुसैन का जिक्र किया है | उन्हें भी
हिन्दू -देवी देवताओं पर बनाये गए अपने कुछ चित्रों पर हिन्दू संगठनों के विरोध और
मुकदमों के कारण आहत होकर देश छोड़ना पड़ा
था | देश में अघोषित रूप से व्याप्त इस ‘सांस्कृतिक आपातकाल’ का समाज के हरेक स्तर
से विरोध होना चाहिए, क्योंकि यदि यह स्थिति यथावत बनी रही तो कला –विधाओं का
प्राण तत्व ही समाप्त हो जाएगा | निर्बाध और निर्द्वंद्व अभिव्यक्ति ही उसे प्राणवान
बनाती है |
वैसे इस बाबत ताज़ा समाचार यह है कि तमिलनाडु में
‘विश्वरूपम्’ पर जारी विवाद के सुलझने के आसार बनने लगे हैं | हालांकि राज्य की
मुख्यमंत्री जे. ललिता ने फिल्म पर लगी पाबंदी को जायज करार दिया है लेकिन
उन्होंने कहा है कि अगर मुस्लिम संगठन और कमल हासन किसी समझौते पर पहुँचते हैं तो
सरकार प्रतिबन्ध हटा लेगी |
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